राजस्थान में हाड़ कंपा देने वाली ठंड: कई जिलों में पारा शून्य के करीब, कोहरा और शीतलहर से जनजीवन बेहाल
राजस्थान में सर्दी का प्रकोप इस वर्ष अपने तीव्रतम रूप में दिखाई दे रहा है। जनवरी की शुरूआत से ही राज्य के कई हिस्सों में पारा गिरकर शून्य डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुँच गया, जिसे मौसम विशेषज्ञ “सीज़न का सबसे ठंडा दौर” बता रहे हैं। न सिर्फ पहाड़ी इलाकों में बल्कि मैदानी क्षेत्रों में भी तापमान में भारी गिरावट के चलते जनजीवन प्रभावित है और लोगों को रोजमर्रा की गतिविधियों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
🧊 ठंड की तीव्रता: पारा शून्य के करीब
राजस्थान के कई प्रमुख इलाकों में न्यूनतम तापमान में अचानक गिरावट आई है। माउंट आबू जैसे हिल स्टेशन पर लगातार तीसरे दिन पारा शून्य डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया गया, जिससे स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य में सात शहरों में रात का पारा 5 डिग्री से नीचे रहा है, जबकि 18 से अधिक स्थानों पर दिन का अधिकतम तापमान भी 20 डिग्री के नीचे दर्ज हुआ। ऐसे में दिन और रात दोनों समय सर्दी का अहसास बिना किसी राहत के बना हुआ है।
जयपुर संभाग के शेखावाटी इलाके—विशेषकर फतेहपुर, सीकर और पिलानी—में तापमान लगातार गिर रहा है और तकरीबन जमाव बिंदु पर पहुँच गया है। वहीं कोटा-बारां इलाकों में धुंध और बादलों के कारण दिन का तापमान भी सामान्य से काफी नीचे है, जिससे लोगों को गलनभरी सर्दी का सामना करना पड़ रहा है।
🌁 घना कोहरा और विजिबिलिटी की समस्या
शीतलहर के साथ-साथ घने कोहरे ने भी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। सुबह-सुबह कोहरे के कारण विजिबिलिटी दहाई से भी कम हो जाती है, जिससे सड़कों पर गाड़ियों के लिए यात्रा जोखिम भरी हो जाती है। खासकर ग्रामीण इलाकों में कोहरा इतना तीव्र होता है कि धुंध के बिना सफर करना मुश्किल हो जाता है। घना कोहरा न सिर्फ ट्रैफिक को प्रभावित करता है, बल्कि स्कूलों और कार्यालयों के सामान्य संचालन में भी अड़चनें खड़ी कर देता है। कई स्थानों पर भारी कोहरे की वजह से स्कूलों के खुलने के समय को भी स्थगित करना पड़ा है।
🧑🏫 जनजीवन पर असर: स्कूल से लेकर रोजमर्रा
ठंड ने राजस्थान के लोगों के दैनिक जीवन पर गहरा असर डाला है:
🏫 स्कूलों में अवकाश
कुछ जिलों में प्रशासन ने ठंड के की वजह से स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी कर दिया है। खासकर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि वे रुकी ठंड में घर से स्कूल न निकलें और स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकें।
🏭 रोजमर्रा के काम
सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मियों के आने-जाने में देरी और कम उपस्थिति देखी जा रही है, क्योंकि सुबह के समय तापमान बहुत कम रहने के कारण लोग घर से बाहर निकलने में हिचक रहे हैं।
🍲 निवासियों की चिंताएँ
पुरानी उम्र के लोग और छोटे बच्चे इस मौसम में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उनके लिए ठंड से बचाव के उचित उपाय अपनाना बेहद आवश्यक है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां हीटर या गर्म कपड़ों की उपलब्धता कम होती है, लोग अधिक कठिनाइयों का सामना करते हैं।
📈 मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजस्थान के कई जिलों में शीतलहर और ठंड की और गिरावट के साथ कोहरे का अलर्ट जारी किया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक यह ठंड का दौर जारी रह सकता है और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं ने पारा गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रात के समय स्पष्ट आसमान भी तापमान में गिरावट का एक कारण है।
🧤 ठंड से बचाव: आवश्यक सावधानियाँ
ठंड के इस मौसम में स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्रशासन दोनों ने लोगों को कुछ विशेष कदम अपनाने की सलाह दी है:
गर्म कपड़े
बाहर निकलते समय हमेशा ऊनी या गर्म कपड़ों का उपयोग करें।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से गर्म टोपी, दस्ताने और मफलर पहनाएं।
🏠 घर को गर्म रखें
सुबह-शाम के समय घर के दरवाजे और खिड़कियों को अच्छी तरह से बंद रखें।
हीटर या कम ताप वाले गैस सिलींग का उपयोग करें, परंतु सुरक्षित दूरी और पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
🍲 स्वास्थ्य पर ध्यान
जरूरी नहीं तो ठंड में लंबे समय तक बाहर न रहें।
घर के अंदर गर्म पेय पदार्थ का सेवन करें, जिससे शरीर को आंतरिक गर्मी मिलती रहे।
🌨️ कृषि और पशुपालन पर प्रभाव
राजस्थान जैसा कृषि प्रधान राज्य ठंड के मौसम से प्रभावित रहता है। पाला और शीतलहर से फसलों को नुकसान का खतरा होता है, विशेषकर गेहूं और सरसों जैसी ठंड मुद्दा फसलों पर। किसान पाला से बचाव के लिए फ़र, मल्चिंग और अन्य संरक्षण उपाय अपनाते हैं। पशुधन भी ठंड से प्रभावित होते हैं, इसलिए पशुपालकों को भी पशुओं को सुरक्षित शेड्स में रखना और गर्म चारे और पानी की व्यवस्था करना चाहिए।
🚗 ट्रैफिक और यात्रा पर असर
कोहरे और गिरते तापमान के कारण सड़क यात्रा में बाधा उत्पन्न हो सकती है। सुबह और रात के समय विजिबिलिटी कम होने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे निर्धारित गति से वाहन चलाएं और आवश्यक स्थिति में फॉग लाइट्स का उपयोग करें।
🧑🔬 विशेषज्ञों की राय
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी और फरवरी का महीना लगभग हर साल ठंडी हवाओं और शीतलहर का सामना करता है, लेकिन इस वर्ष पारा शून्य के नज़दीक पहुंचना इस सर्दी को विशेष बनाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में अल्पमत में माइनस तापमान तक दर्ज होने की संभावना पर भी चेतावनी जारी की गई है।
✍️ निष्कर्ष
राजस्थान में इस बार का ठंड का चक्र बेहद मजबूत और प्रभावशाली रहा है। पारा शून्य के करीब पहुँचने, कोहरे और शीतलहर की स्थितियों ने लोगों के दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और यात्रा को प्रभावित किया है। मौसम विभाग के अलर्ट और प्रशासन की सावधानियों के बीच जनता को अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति सजग रहना आवश्यक है। इस सर्दी में खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए उचित तैयारी, सावधानियों और समय पर जानकारी से ही हम ठंड से होने वाले प्रभावों को कम कर सकते हैं।
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